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Showing posts from April, 2018

जीवन का उद्देश्य

जीवन का उद्देश्य। कया जनम ले कर मरना , यही जीवन का उद्देश्य है? धर्म के लिये जीना और धर्म के लिए मरना यही जीवन का उद्देश्य है। परंतु यहाँ बात पर गौर करना कि धर्म का मतलब यह नही की आप यदि हिन्दू हैं या इसाई हैं तो आप साम्प्रदायिक दंगों में भाग लें। धर्म के संस्कृति भाषा में बहुत मतलब होते हैं। और इसी कारण कभी कभी हम इसका गलत मतलब निकाल लेते हैं। जैसे कि सूर्य का धर्म है सौर्य मण्डल को ऊर्जा देना। कुछ भी हो जाये सूर्य देव रोज़ अपने धर्म का पालन करते हैं। ठीक उसी तरह, मनुष्य का धर्म है की वो अपने कर्तव्यों का पालन करे और कुछ भी हो जाये, कितनी ही विपरीत स्तिथि क्यों ना उत्त्पन्न हो जाये, वह अपने कर्तव्य और ज़िम्मेदारियों को निभाता चले, फिर चाहे वह उसकी निजी जिंदगी में हो या फिर उसकी व्यवसायिक ज़िन्दगी में। हम सभी को एक शरीर मिलता है, उसमें पांचो इन्द्रियाँ समान होती हैं, जिससे हम सभी स्तथूल शरीर का अनुभव करते हैं, पशु पक्षियों के पास भी यही इन्द्रियाँ होती हैं, किन्तु मनुष्य के पास एक विशेष तरह का विवेक होता है, जिसके द्वारा वह उचित-अनुचित, सत्य-असत्य, धर्म-अधर्म का भेद करता है। विव...